Monday, December 9, 2013

Dushman na kare

दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया हैं
दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं

तूफां में हम को छोड़ के साहिल पे आ गये
तूफां में हम को छोड़ के साहिल पे आ गये
साहिल पे आ गये
नाखुदा का, नाखुदा का...हम ने जिन्हे नाम दिया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं
दुश्मन ना करे ओ ओ...

पहले तो होश छिन लिये जुल्म-ओ-सितम से
पहले तो होश छिन लिये जुल्म-ओ-सितम से
जुल्म-ओ-सितम से
दीवानगी का......दीवानगी का फिर हमें इल्ज़ाम दिया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं
दुश्मन ना करे ओ ओ...

अपने ही गिराते हैं नशेमन पे बिजलियाँ
अपने ही गिराते हैं नशेमन पे बिजलियाँ
नशेमन पे बिजलियाँ
गैरो ने आ के...
गैरो ने आ के फिर भी उसे थाम लिया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं

दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया हैं
उम्रभर का गम हमें इनाम दिया हैं

From Akhir Kyon, 


P.S.

What a fabulously beautiful song this is, no?

And Smita Patil was absolutely ethereal in it! Lovely trip down memory lane in piecing this song together, hopefully perfectly. Do write in, if I have missed something :-)

Why am I blogging this here now? Ha ha let's not get into that, shall we? 

  


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Hello and welcome! I am someone who is passionate about poetry and motorcycling and I read and write a lot (writing, for me has been a calling, a release and a career). My debut collection of English poems, "Moving On" was published by Coucal Books in December 2009. It can be ordered here My second poetry collection, Ink Dries can be ordered here Leave a comment or do write to me at ahighwayman(at)gmail(dot)com.

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